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【标题】कविता
【摘要】आज राष्ट्रीय बालिका दिवस के उपलक्ष्य में बालिकाओं पर केंद्रित कविता का पुनः प्रकाशन (प्रतिक्रियाओं सहित.. ) - बेटियाँ- डॉ. बशीर, चेन्नैये गुल नहीं, गुलज़ार हैंहर घर में बेटियाँख़ुदा का उपहार हैंमहकती बसंत बहार हैंपरिवार का दुलार हैंमोहब्बत का इज़हार हैंये ममता का पारावार हैंसेवा का अवतार हैंसुख-दुःख में भागीदार हैंबेटियाँ हो तो...हर घर में, हर दिन त्यौहार हैखेलती-कूदती, मचलती-महकतीख़ुशबू की बयार हैंहमारी संपत्ति और प्यार कीहमेशा हकदार हैंबेटियाँ...घर घर का सुख-सागर हैंबेटियाँ कहीं लक्ष्मी बनकरदौ... (04-09 11:42)